वृंदावन लाल वर्मा की उपलब्धियां झांसी की धरोहर हैं -ए.के.मिश्र, डीआरएम/झांसी

    मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय, झांसी में डॉ. वृंदावन लाल वर्मा की जयंती मनाई गई

    इलाहाबाद ब्यूरो, झांसी : मंडल रेल प्रबंधक ए. के. मिश्र और अपर मंडल रेल प्रबंधक विनीत सिंह एवं कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. जगदीश खरे एवं डॉ. संजय सक्सेना तथा बाबू जी के पौत्र लक्ष्मीकांत वर्मा, रमाकांत वर्मा एवं प्रपौत्र मधुर वर्मा द्वारा सुविख्यात साहित्यकार पद्मभूषण बाबू वृंदावनलाल वर्मा की जयंती समारोह का उद्घाटन मां सरस्वती एवं बाबू वृंदावनलाल वर्मा के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलित कर किया गया. कार्यक्रम के आरंभ में राजभाषा अधिकारी एम. एम. भटनागर ने सभी उपस्थित अतिथियों का स्वागत करते हुए बाबू वृंदावन लाल वर्मा की जयंती मनाए जाने के संबंध में अपने विचार व्यक्त किए.

    इस अवसर पर कार्यक्रम के अध्यक्ष मंडल रेल प्रबंधक ए. के. मिश्र ने कहा कि बाबू जी का जन्म झांसी जनपद के मऊरानीपुर कस्बे में 9 जनवरी, 1889 को एक कायस्थ परिवार में हुआ था. उनके पिता बाबू अयोध्या प्रसाद झांसी में रजिस्ट्रार कानूनगो के पद पर कार्यरत थे और उनकी माता श्रीमती सबरानी देवी एक वैष्णव भक्त थीं. बाबू जी के पूर्वज ओरछा नरेश छत्रसाल की सेवा में रहे थे और उनके परदादा आनंदी राय झांसी की महारानी लक्ष्मीबाई के दीवान थे. इन्हीं की वजह से उनके मन में इतिहास और वीर पुरुषों के प्रति गहरा आकर्षण पैदा हुआ और इन्हीं सब की झलक उनके व्यक्तित्व में मिलती है.

    श्री मिश्र ने कहा कि बाबू जी ने अपने लेखन के माध्यम से समाज को जो कुछ दिया है, उसे देखते हुए ही भारत सरकार द्वारा सन् 1965 में उन्हें पद्मभूषण की उपाधि से सम्मानित किया गया. उनको और अधिक सम्मान देते हुए भारत सरकार द्वारा 9 जनवरी, 1967 को उनकी स्मृति में एक डाक टिकट जारी किया गया. उनकी सभी उपलब्धियां झांसी की धरोहर हैं. वर्मा जी जैसे महान लोगों के व्यक्तित्व और कृतित्व की सराहना के अलावा उनके द्वारा अपनाए गए सिद्धांतों और उनके विचारों पर अमल करना आवश्यक है और यही उनके प्रति सच्चा सम्मान होगा, कृतज्ञता होगी.

    इस अवसर पर मुख्य राजभाषा अधिकारी एवं अपर मंडल रेल प्रबंधक विनीत सिंह ने कहा कि साहित्य मानव जीवन का अंग है और व्यक्ति किसी भी क्षेत्र का हो उसका साहित्य से संबंध रहता ही है और यदि साहित्य यथार्थवादी हो, तो आम जनमानस के मन-मस्तिष्क में रच-बस जाता है, यही खूबी वर्मा जी के साहित्य की है. उन्होंने कहा कि वर्मा जी का साहित्य अत्यंत प्रभावशाली है और प्रत्येक पाठक पर अपना प्रभाव छोड़ता है. वर्मा जी की प्रारंभिक शिक्षा ललितपुर से शुरू हुई, आगरा से बीए और एलएलबी किया और झांसी में आकर वकालत शुरू की. साहसी प्रवृत्ति के होने के कारण उन्हें बचपन से ही शिकार करने का बहुत शौक था और वे झांसी के आस-पास के जंगलों में शिकार को जाया करते थे. उनका अध्ययन गहन था और उन्हें प्रत्येक विषय पर महारथ हासिल थी.

    उन्होंने कहा कि वर्मा जी के उपन्यासों में इतिहास का सजीव चित्रण है, जिसके कारण उनके उपन्यास वर्तमान परिवेश के समान प्रतीत होते हैं. उनके ऐतिहासिक उपन्यासों के कारण ही उन्हें हिंदी का ‘सर वाल्टर स्कॉट’ माना जाता है. उनकी साहित्य सेवा के कारण सन् 1958 में आगरा विश्वविद्यालय ने उन्हें ‘डी लिट्’ की मानद उपाधि तथा भारत सरकार ने 1965 में पद्मभूषण की उपाधि प्रदान की. उन्हें ‘सोवियत लैंड नेहरू एवार्ड’ से भी सम्मानित किया गया. उन्होंने जो सिद्धांत अपनाए, उन्हें हम सभी अपनाएं और उन्हीं के विचारों के अनुरुप चलकर देश की सेवा करें, यही उनके प्रति सच्चा सम्मान होगा.

    समारोह में झांसी नगर क्षेत्र के प्रतिष्ठित साहित्यकार वक्ताओं को भी आमंत्रित किया गया. इसी क्रम में आमंत्रित अतिथि वक्ता डॉ. जगदीश खरे ने बताया कि वर्मा जी नें अपने उपन्यासों में प्रकृति के सौंदर्य के दृश्यों की बखूबी प्रस्तुति की है. वर्तमान में वर्मा जी के साहित्य के समान न तो अंग्रेजी साहित्य है और न ही कोई दूसरा हिन्दुस्तानी साहित्य है. उन्होंने बताया कि कोई भी साहित्यकार अपनी आत्मकथा की प्रस्तुति नहीं करता, परंतु वर्मा जी ने बताया कि आत्मकथा ऐसी विधा है जिसमें साहित्यकार की सच्चाई सामने आती है. उन्होंने अच्छी तरह से इतिहास को रचा. उनका उपन्यास ‘झांसी की रानी’ जनक्रांति की गीता मानी जाती है. वर्मा जी एक महान आत्मा थे.

    इस अवसर पर डॉ. संजय सक्सेना ने कहा कि वर्मा जी ने यथार्थ का चित्रण किया. उन्होंने एक स्थान पर लिखा है कि यथार्थ और आदर्श में हमें आदर्श को तो स्थापित करना ही पडे़गा. आदर्श निर्दिष्ठ गंतव्य पर ले जाता है. इनके अलावा विशेष रूप से आमंत्रित बाबू वृंदावन लाल वर्मा के पौत्र लक्ष्मीकांत वर्मा एवं रमाकांत वर्मा ने कहा कि धरोहरें दो प्रकार की होती हैं - राष्ट्रीय एवं पारिवारिक - अर्थात वर्मा जी राष्ट्रीय एवं पारिवारिक दोनों धरोहर थे. उन्होंने वर्मा जी के जीवन से जुड़े रोमांचित और प्रेरित करने वाले संस्मरणों को सुनाकर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया.

    इससे पूर्व बाबू वृंदावन लाल वर्मा के जयंती दिवस पर 9 जनवरी 2017 को ही स्टेशन परिसर में स्थित वर्मा जी की प्रतिमा के साथ ही स्थापित राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त एवं आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी की प्रतिमाओं पर अपर मंडल रेल प्रबंधक एवं अपर मुख्य राजभाषा अधिकारी विनीत सिंह द्वारा माल्यार्पण कर वर्मा जी को पुष्पांजलि अर्पित की गई.

    संगोष्ठी में डॉ आर. ए. साहू, अपर मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, विष्णुकांत तिवारी, वरिष्ठ मंडल वित्त प्रबंधक, संजय भगत, वरिष्ठ मंडल इंजी/समन्वय, दुर्गेश दुबे, वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक, श्रीकृष्ण शुक्ल, वरिष्ठ मंडल परिचालन प्रबंधक, पी. पी. वर्मा, वरिष्ठ मंडल विद्युत इंजी क/वि,  आशीष मिश्रा वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त, अनुराग श्रीवास्तव, वरिष्ठ मंडल सिग्नल एवं दूरसंचार इंजी, मनमोहन, मंडल कार्मिक अधिकारी, कमलेश शुक्ला, ईडीपीएम, डी. के. गुप्ता, सहायक मंडल संरक्षा अधिकारी आदि अधिकारी एवं पर्यवेक्षक तथा कर्मचारीगण उपस्थित थे. कार्यक्रम को सफल बनाने में मंडल कार्यालय के राजभाषा विभाग में कार्यरत एम. एम. शर्मा, श्रीकांत शर्मा एवं राजेश कुमार त्रिपाठी का सहयोग सराहनीय रहा. कार्यक्रम का संचालन राजभाषा अधिकारी एम. एम. भटनागर ने किया तथा भगवानदास, वरिष्ठ अनुवादक द्वारा सभी अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया.

सम्पादकीय