क्रिकेट - मनोरंजक खेल के नाम पर धोखा

    ‘अंडरवर्ल्ड कप’ - क्रिकेटी फ्रॉड पर लिखी गई एक विश्वसनीय पुस्तक

    'क्रिकेट का मनोरंजन - एक सबसे बड़ा फ्रॉड और मूर्ख बनते करोड़ों लोग'

    ‘अंडरवर्ल्ड कप’ (मीडिया, मोदी, मुद्गल, ममता - सब दाऊद के संपर्क में)

    टी-20 वर्ल्डकप 2016 के सभी मैच फिक्स थे? ‘अंडरवर्ल्ड कप’ में है सभी सवालों का जवाब

    क्रिकेट सटोरियों के लिए अत्यंत लाभदायक है पुस्तक, जो क्रिकेटी सट्टा पर उठाते हैं नुकसान

    ‘अंडरवर्ल्ड कप' (मीडिया, मोदी, मुद्गल, ममता - सब दाऊद के संपर्क में) अतुल कुमार द्वारा लिखित और डायमंड बुक्स द्वारा प्रकाशित, जिसका विमोचन हाल ही में प्रगति मैदान, नई दिल्ली में आयोजित पुस्तक मेले में हुआ है, नवीनतम पुस्तक है, जिसमें क्रिकेट के नाम पर चल रहे अंतरराष्ट्रीय फ्रॉड को जानकर आप हतप्रभ रह जाएंगे. इस पुस्तक को पढ़कर आप निश्चित रूप से जान पाएंगे कि वर्षों से खेला जा रहा क्रिकेट वास्तव में वह खेल नहीं है, जो आपको कमेंटरी, क्रिकेट विशेषज्ञों, मीडिया की रिपोटों, आईसीसी और बीसीसीआई तथा क्रिकेट की कथित महान हस्तियों द्वारा बताया जाता रहा है.

    क्रिकेट अब वास्तव में कोई मनोरंजक खेल नहीं रह गया है, बल्कि अब यह रोजाना सट्टेबाजी सिंडिकेटों द्वारा लाखों-करोड़ों डॉलर कमाने का मात्र एक मंच बनकर रह गया है. मैदानों में खिलाड़ी केवल अपने टीम मालिकों के कहे अनुसार उस मैच के लिए अपनी निर्धारित भूमिका अदा करते हैं. कमेंटेटर, क्रिकेट एक्सपर्ट और बड़े क्रिकेट पत्रकार बहुत मोटा पैसा कमाते हैं और हमें मूर्ख बनाकर मजे करते हैं. इस पुस्तक से पाठकों को यह भी ज्ञात होगा कि जिन्हें हम महान समझते हैं, वास्तव में उनकी प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष शह से किस प्रकार यह विशालकाय फ्रॉड चल रहा है.

    अतुल कुमार, जो कि एक जाने-माने अदम्य साहसी व्यक्ति और भारतीय रेलवे भंडार सेवा (आईआरएसएस) के पूर्व अधिकारी रहे हैं, ने इससे पहले इस विषय पर तीन और पुस्तकें लिखी हैं -  (1) ‘Inside the Boundary Line’, (2) ‘Bettors Beware’ जिसका पुनर्प्रकाशन ‘All Cricket Matches are Fixed' शीर्षक से हुआ है, और (3) ‘Cricket : The Massive Fraud’. अतुल कुमार ने अत्यंत लगन और कड़ी मेहनत से अपनी इन पुस्तकों में उपरोक्त बातों को जनता की जागरूकता के लिए वैज्ञानिक ढंग से सिद्ध किया है.

    इनमें से कुछ पुस्तकों का प्रकाशन हिंदी और कुछ क्षेत्रीय भाषाओं में भी हुआ है. लेकिन इस विशालकाय फ्रॉड में मीडिया मुगलों के सम्मिलित होने के कारण जनता को अब तक इन पुस्तकों और इनकी विषय-वस्तु के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त नहीं हो पाई है. प्रस्तुत पुस्तक 'अंडरवर्ल्ड कप' में लगभग सभी क्रिकेट मैचों का संक्षिप्त विवरण है, जिससे पाठक भली-भांति समझ सकते हैं कि किस प्रकार टी-20 वर्ल्ड कप 2016 के सभी क्रिकेट मैच फिक्स थे.

    यह कहने से कि सब मैच फिक्स होते हैं, बहुत सारे प्रश्न पैदा होते हैं. अपनी इस पुस्तक में अतुल कुमार उन सभी प्रश्नों और शंकाओं का समाधान कुछ इस तरह से करते हैं, जिससे पाठकों को उनकी बात आसानी से समझ में आ जाती है. क्रिकेट प्रेमियों का शायद ही ऐसा कोई प्रश्न हो, जिसका जवाब या समाधान करने की कोशिश अतुल कुमार ने अपनी इन पुस्तकों में न किया हो.

    क्रिकेट के माध्यम से सरेआम हो रहे इस भयानक फ्रॉड के लिए राजनेताओं का आशीर्वाद जरूरी है. प्रस्तुत पुस्तक 'अंडरवर्ल्ड कप' में अतुल कुमार ने स्पष्ट रूप से राजनेताओं, अंडरवर्ल्ड, आईसीसी, क्रिकेट खिलाड़ियों, सटोरियों, क्रिकेट की जानी मानी हस्तियों, न्यायाधीशों, पुलिस और मीडिया के बीच की मिलीभगत को अदम्य साहस के साथ उजागर किया है. इसी सांठ-गांठ का नतीजा है कि चार वर्ष पहले ही इसकी पूरी कलई खुल जाने के बावजूद यह विशाल फ्रॉड धड़ल्ले से चलाया जा रहा है, जिसमें उपरोक्त सभी संस्थाओं की पूरी मिलीभगत है.

    अतुल कुमार भारतीय रेल में एक जाना-पहचाना नाम है. स्वेच्छिक सेवानिवृति से पहले उन्होंने संस्थागत भ्रष्टाचार के जरिए रेलवे द्वारा की जाने वाली खरीद में हो रहे सालाना पांच हजार करोड़ रुपए के नुकसान को उजागर किया था. यह उनके अथक प्रयासों का ही परिणाम था कि एक कमेटी, जिसके सदस्य वर्तमान रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष भी थे, द्वारा इस भारी हानि और संस्थागत भ्रष्टाचार को रोकने के लिए आवश्यक सुझाव दिए गए और सिफारिशें की गईं थीं. दुर्भाग्यवश वह सभी महत्वपूर्ण सिफारिशें अब तक लागू नहीं हुई हैं. यद्यपि मेट्रो-मैन ई.श्रीधरन ने भी बाद में इस हानि की न सिर्फ पुष्टि की थी, बल्कि उक्त कमेटी की सभी सिफारिशों और सुझावों को अविलंब लागू किए जाने की जरूरत भी बताई थी.

    पाठकों को यह जानकर शायद सुखद आश्चर्य होगा की इस महत्वपूर्ण पुस्तक के लेखक अतुल कुमार कभी क्रिकेटर नहीं रहे. यह एक असाधारण एवं ऐतिहासिक घटना है कि उन्होंने अपनी पैनी दृष्टि और सामान्यबोध के उपयोग मात्र से विश्व में चल रहे सबसे बड़े अंतर्राष्ट्रीय फ्रॉड का भंडाफोड़ किया है. उनके द्वारा आईसीसी और बीसीसीआई को सीधे तौर पर दी गई चुनौती बाबजूद आईसीसी और बीसीसीआई न तो इन पुस्तकों में अतुल कुमार द्वारा दिए गए तथ्यों को लेशमात्र झुठला पाए हैं और न ही उनके विरुद्ध कुछ कर पाए हैं.

    इसके विपरीत, अतुल कुमार की पुस्तकों की देश के श्रेष्ठ पत्रकारों ने समय-समय पर प्रशंसा की है. मजे की बात यह भी है कि अभी हाल ही में लंदन में गिरफ्तार क्रिकेट बुकी संजीव चावला ने क्रिकेट के खेल में चल रही अंतरराष्ट्रीय सट्टेबाजी और मैच फिक्सिंग के बारे में लंदन पुलिस को जो बयान दिया, उससे भी अतुल कुमार द्वारा अपनी पुस्तकों में दिए गए तमाम तथ्यों की पुष्टि होती है. कहा जा सकता है कि अतुल कुमार की पुस्तक 'अंडरवर्ल्ड कप' न केवल आईसीसी और बीसीसीआई, बल्कि पूरी भारतीय मीडिया और वर्तमान सरकार सहित तमाम भारतीय राजनेताओं के मुंह पर भी एक बहुत बड़ा तमाचा है.

    अतुल कुमार की हैरतअंगेज अंतर्दृष्टि और स्पष्टवादिता, जो कि उनकी इस पुस्तक 'अंडरवर्ल्ड कप' में अपने सर्वश्रेष्ठ रूप में उभर कर सामने आई है, विश्व भर में क्रिकेट प्रेमियों की आँखें खोलने के लिए पर्याप्त है. किस प्रकार सट्टेबाजी सिंडिकेटों के लाभ के लिए टी-20 वर्ल्ड कप 2016 के मैच फिक्स किए गए थे. इसका विस्फोटक वर्णन इस पुस्तक में किया गया है. क्या दो नो-बॉल भारत के वर्ल्ड कप से बाहर होने का कारण हो सकती थीं, जैसा कि कथित क्रिकेट विशेषज्ञों द्वारा हमें बताने का प्रयत्न किया गया? या एक विशेष उद्देश्य के लिए उन्हें स्क्रिप्ट में समाहित किया गया था?

    ‘छोड़े गए कैच, बढ़िया कैच, बहुत बढ़िया रन आउट, आसान रन आउट अवसरों को गंवाना, बढ़िया फील्डिंग, खराब फील्डिंग इत्यादि - इन सबका समावेश स्क्रिप्ट में किया जा सकता है और इन्हें पहले से निर्धारित किया जा सकता है. इनका समावेश रोमांच पैदा कर अधिकाधिक दर्शकों को आकर्षित करने के लिए किया जाता है. क्रिकेट में सट्टेबाजी के लिए ‘मैच फिक्सिंग’ की जाती है, और सट्टेबाजी के माध्यम से ही इसे सिद्ध किया जा सकता है.

    प्रस्तुत पुस्तक में अतुल कुमार ने स्पष्ट रूप से यह कहने का प्रयास किया है कि क्रिकेट के खेल में क्रिकेट खिलाड़ियों का हर कदम पहले से निर्धारित होता है, बल्ले को किस प्रकार घुमाना है, किस बॉल को किस तरह खेलना है, कब खेलना है, कब नहीं, कब रन आउट या पगबाधा आउट होना है, कितना आगे बढ़कर गेंद को खेलना है, बॉलर द्वारा किस प्रकार गेंद को फेंका जाना है, कब टप्पा खाती गेंद डालनी है, कब बाउंसर डालना है, कब तक पिच पर बने रहना है, कब आउट होना है, कितने रन बनाना है, कब क्या करेगा, क्या नहीं करेगा, इत्यादि सब कुछ पहले से तय होता है.

    अतुल कुमार कहते हैं कि ‘भारत और पाकिस्तान के क्रिकेट मैच फिक्स होने के राजनीतिक अर्थ बहुत गंभीर हैं. ऐसा हो ही नहीं सकता कि इन देशों के नेता इन मैचों की फिक्सिंग से अनभिज्ञ हों.’

    ‘मीडिया और सरकार कम से कम इतना तो कर सकते हैं कि जनता को बता दें कि क्रिकेट डब्ल्यूडब्ल्यूई की कुश्ती के समान है, जिसमें उसके मनोरंजन के लिए सब कुछ पहले से तय किया गया है, यह अनिश्चितताओं का खेल नहीं रह गया है. इस आसान कार्यवाही से ही दाऊद के वित्तीय हितों को भारी धक्का लगेगा.’

    All Cricket Matches are Fixed, क्रिकेट सबसे बड़ा फ्रॉड और मूर्ख बनते लोग और Phakeland.' के लेखक द्वारा समयानुसार परखी हुई तथा भारत और दुनिया को हिलाकर रख देने वाली सच्चाई इस पुस्तक में है.

    दुनिया भर के क्रिकेट प्रेमियों और स्वयं को बुद्धिजीवी समझने तथा क्रिकेट के महान जानकार कहलाने वाले तमाम भारतीयों के लिए यह पुस्तक पढ़ना अत्यंत आवश्यक है. क्रिकेट पर सट्टा लगा-लगाकर नुकसान उठाने वालों के लिए भी यह पुस्तक विशेष रूप से लाभकारी है. पुस्तक रेलवे स्टेशनों पर ए. एच. व्हीलर के बुक स्टॉलों पर उपलब्ध है. ‘रेलवे समाचार’ अपने पाठकों से इस बात की गुजारिश करता है कि वे क्रिकेट की वास्तविक सच्चाई से अधिक से अधिक लोगों को अवगत कराएं, जिससे वृहद् स्तर पर समाज का भला हो, क्योंकि लोगों को अब तक मालूम नहीं है कि क्रिकेट में फिक्सिंग की जड़ें कहाँ तक और कितनी गहरी हैं?

    यह पुस्तक ऑनलाइन http://www.diamondbook.in/underworld-cup.html पर भी उपलब्ध है. अन्य ऑनलाइन बुक स्टोरों पर भी शीघ्र ही उपलब्ध होगी.

    लेखक : अतुल कुमार, भारतीय रेल के पूर्व आईआरएसएस अधिकारी
    (c) प्रकाशक :
    डायमंड बुक्स, नई दिल्ली
    #मूल्य : 150/- रुपये

    प्रस्तुति : सुरेश त्रिपाठी

सम्पादकीय