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उद्देश्य से भटक रहा सतर्कता संगठन

रेलवे सतर्कता संगठन का घोषित उद्देश्य रेलवे रेवेन्यु की लीकेज को रोकना और लीकेज के लूप होल्स को खोजकर उन्हें बंद करना तथा रेल कर्मचारियों को भ्रष्टाचार के प्रति जागरूक करना है, मगर ऐसा लगता है की यह संगठन कहीं अपने उक्त घोषित उद्देश्यों से भटक रहा है और रेल कर्मचारियों एवं अधिकारियों पर अपनी प्रभुसत्ता और दहशत बनाए रखने के लिए अनावश्यक और फिजूल केस बना रहा है. म. रे. विजिलेंस द्वारा बनाया गया ऐसा ही एक बेमतलब मामला 'रेलवे समाचार' की जानकारी में आया है, जिसमें न तो कोई विजिलेंस ऐंगल है, और न ही पैसे का लेनदेन अथवा किसी प्रकार की अनियमितता पाई गई है. यह मामला कुर्ला टर्मिनस पर पांच टिकट चेकिंग स्टाफ के खिलाफ विजिलेंस ने बनाया है और उन्हें नान-मेल-एक्सप्रेस स्टापेज स्टेशनों पर ट्रांसफ़र करने का आदेश दिया है.

प्राप्त जानकारी के अनुसार इन पांचो स्टाफ में से एक स्टाफ अपनी नाइट शिफ्ट करके गया था और अगले दिन उसका रेस्ट था. उसके अगले दिन उसे डिसेंट्री होने पर उसने प्राइवेट मेडिकल सर्टिफिकेट (पीएमसी) दिया था. जबकि बाकी चार स्टाफ बताते हैं कि समय पर अपनी ड्यूटी पर आए तो थे, मगर टीसी कार्यालय में विजिलेंस इंस्पेक्टरों के बैठे होने से उन्होंने मस्टर पर साइन नहीं किया था. बाद में जब इन पांचों के खिलाफ ड्यूटी में लापरवाही का विजिलेंस केस बनाया जाने लगा तो यह चारों भी वापस चले गए और उन्होंने भी उस दिन का पीएमसी दे दिया. इसके बाद विजिलेंस द्वारा बुलाए जाने पर इन पांचों ने यही सब विजिलेंस को भी लिखकर दिया था. तथापि इन पांचों कर्मचारियों को नान-मेल-एक्सप्रेस स्टापेज स्टेशनों पर ट्रांसफ़र करने का आदेश विजिलेंस ने डिसिप्लिनरी अथोरिटी (डीए) को भेज दिया.

इस संबंध में जब 'रेलवे समाचार' ने सम्बंधित विजिलेंस अधिकारियों से पूछताछ की और उनसे यह पूछा कि इस मामले में विजिलेंस ऐंगल क्या था, तो उनका कहना था कि अनुशासन बनाए रखने के लिए ऐसा करना पड़ता है. इस पर जब उनसे यह कहा गया कि अनुशासन बनाना विजिलेंस का काम नहीं है, बल्कि इस मामले में उनका विजिलेंस ऐंगल क्या है, यह स्पष्ट करें, तो उनके पास इसका कोई जवाब नहीं था, बल्कि उन्होंने कहा कि आपको (प्रेस को) यह पूछने का अधिकार नहीं है. इसके बाद जब वरिष्ठ विजिलेंस अधिकारी को बात की गई तो उनका कहना था कि किसी के साथ अन्याय नहीं होगा. इस पर जब उन्हें यह बताया गया कि पांचों स्टाफ को बिना मतलब अन्यत्र ट्रांसफ़र करके अन्याय तो विजिलेंस ने कर दिया है और विजिलेंस ने इस प्रकार अन्य स्टाफ के बीच इन पांचों की विश्वसनीयता को भी संदिग्ध बना दिया है. इस पर उनका कहना था कि डीए को यदि ऐसा लगता है तो वह मामले को रेफर बैक कर सकता है.

इस पर भी जब उन्हें यह कहा गया कि कोई भी डीए विजिलेंस को मामला रेफर बैक करने के बजाय विजिलेंस के कहे अनुसार आँख मूंदकर उस पर अमल करना बेहतर समझता है, फिर भले ही वह स्टाफ को बेकसूर मानता हो और उसके स्टाफ के साथ अन्याय हो रहा हो, क्योंकि कोई डीए भी विजिलेंस से पंगा नहीं लेना चाहता है.. इस पर उनके पास कोई जवाब नहीं था. उन्होंने यह कहकर बात को ख़त्म कर दिया कि वह मामले पर गौर करेंगे. विजिलेंस द्वारा इस प्रकार के बेमतलब मामले बनाए जाने और इस प्रकार सिर्फ विजिलेंस मामलों की संख्या बढ़ाने की जानकारी 'रेलवे समाचार' ने उच्च अधिकारियों को दी है और उनसे यह मांग भी की है कि पिछले कुछ महीनों के दौरान बनाए गए सभी विजिलेंस मामलों की समीक्षा की जाए और ऐसे अनावश्यक मामलों को रद्द किया जाए. 'रेलवे समाचार' अपने स्तर पर भी अब ऐसे विजिलेंस मामलों की समीक्षा प्रकाशित करके रेल प्रशासन के समक्ष प्रस्तुत करेगा.

 

 

 


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