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व्यभिचार का अड्डा बना रेल भवन

नयी दिल्ली : भारतीय रेल का प्रतिष्ठित मुख्यालय 'रेल भवन' कुछ अधिकारियों के कदाचार और व्यभिचार का अड्डा बन गया है. बताते हैं कि यहाँ डिप्टी डायरेक्टर स्तर के कुछ अधिकारियों का एक गुट या गिरोह है, जो रेलवे बोर्ड में कार्यरत कुछ घाघ किस्म की महिला कर्मियों को अपने साथ मिलाकर व्यभिचार का एक बड़ा रैकेट चला रहा है. इस गुट का रिंग लीडर एक एएम स्तर का अधिकारी बताया गया है. विश्वसनीय सूत्रों का कहना है कि यह रिंग लीडर पहले यह देखता है कि कौन सी महिला कर्मी उसके जाल में आसानी से फंस सकती है. इसके बाद वह उसे किसी न किसी बहाने से अथवा कोई फाइल लेकर अपने चेम्बर में बुलाता है. फिर बड़े प्यार से उसे कुर्सी पर बैठने के लिए कहता है. फिर उसके लिए चाय-काफी का आर्डर करता है. इसी बीच वह उक्त महिला कर्मी के हाल-चाल पूछता है. परिवार में कौन-कौन है, शादी की है या नहीं, बच्चे कितने हैं, यह पूछकर उसके साथ अपनी आत्मीयता प्रदर्शित करता है. इसके बाद बड़ी मासूमियत के साथ धीरे से उसके शारीरिक गठन की तारीफ कर देता है. इसके बाद यदि महिलाकर्मी ने कोई जवाब नहीं दिया तो वह समझ जाता है कि उससे यह काम नहीं होगा और यदि महिला अपनी तारीफ सुनकर थोड़ी भी बेतकल्लुफ हो जाती है, तो वह आगे भी साहस करके शुरू हो जाता है, वाह.. वाह.. क्या बात है, दो बच्चे होने (या नहीं होने पर भी) के बाद भी आपने अपने को बहुत मेनटेन करके रखा है.. आप अपना और अपने फिगर का शायद बहुत ध्यान रखती हैं.. आपको अगर कोई परेशानी हो तो हमें बताना.. चलो कभी लंच पर चलते हैं.. और फिर यह कहते हुए कि चिंता मत करो, हम आपको घर पर ड्राप कर देंगे.. आदि-आदि.. से लेकर धीरे-धीरे यह बात और मुलाकात देर रात के डिनर और होटलबाजी तक पहुँच जाती है. सूत्रों कहना है कि इस रिंग लीडर का महिलाकर्मी को पटाने का यह सिलसिला कई दौर तक चलता रहता है, और अगर वह यह महसूस करता है कि यह काम उसके वश का नहीं है, तो वह यह काम अपने गुट के किसी अन्य साथी अधिकारी को अथवा गुट की ही किसी महिला सहकर्मी को सौंप देता है.

विश्वसनीय सूत्रों का कहना है कि इस रिंग लीडर के साथ इस व्यभिचार में सिर्फ रेलवे बोर्ड के ही कुछ अधिकारी नहीं, बल्कि कार्मिक एवं गृह मंत्रालय के भी कुछ समकक्ष अधिकारी शामिल हैं. सूत्रों का कहना है कि हाल ही में एक ऐसा ही मामला उजागर हुआ है. बताते हैं कि एक बंगाली महिला सेक्शन आफिसर इस गुट के एक डिप्टी डायरेक्टर के चंगुल में फंस गई थी. जिसने पहले तो काफी दिनों तक उसका शारीरिक शोषण किया, फिर एक दिन धोखे से उसकी अश्लील सीडी बना ली और उसे ब्लैकमेल करने लगा. सूत्रों का कहना है कि उसकी यह ब्लैकमेलिंग पैसे के लिए नहीं, बल्कि गुट के और अन्य मंत्रालयों के इस गुट में शामिल अधिकारियों के साथ भी सम्बन्ध बनाने के लिए उसका इस्तेमाल करने हेतु होती थी. सूत्रों का कहना है कि उसकी इस ब्लैकमेलिंग से जब यह बंगाली महिला सेक्शन आफिसर काफी तंग हो गई, तब एक दिन उसने अपने एक पुरुष मित्र से इसकी चर्चा कर दी. सूत्रों ने बताया कि यह बात सुनकर उसके इस पुरुष मित्र को बहुत गुस्सा आया और उसने तत्काल इस डिप्टी डायरेक्टर को सबक सिखाने की ठान ली. बताते हैं कि उक्त बंगाली महिला सेक्शन आफिसर का यह पुरुष मित्र उसी दिन डीजी/आरपीएफ के चेम्बर में गया और उन्हें सारी बात बताई. सूत्रों का कहना है कि यह सब सुनकर आगबबुला हुए डीजी/आरपीएफ ने उक्त डिप्टी डायरेक्टर को फ़ौरन तलब कर लिया और अपने चेम्बर में बैठा लिया तथा उससे चेम्बर से बाहर गए बिना ओरिजिनल सीडी तत्काल मंगाने को कहा. वरना उसे ऐसे केस में जेल भेजवाने की धमकी दी कि उसकी कभी जमानत तक नहीं होगी. इसके बाद बताते हैं कि इन डिप्टी डायरेक्टर महोदय की रूह कांपने लगी और उन्होंने तत्काल आदेश का पालन करते हुए अपने गुट के ही एक अन्य अधिकारी को मोबाइल पर काल करके उक्त सीडी फ़ौरन लेकर डीजी/आरपीएफ के चेम्बर में आने को कहा. सूत्रों का कहना है कि यह सारा घटनाक्रम कुछ इतनी तेजी से घाटा कि बोर्ड में किसी को कानो-कान भनक भी नहीं लग सकी.

उल्लेखनीय है कि एक ऐसा ही व्यभिचार इस्टेट एंट्री रोड स्थित रेल निवास में कुछ समय पहले पकड़ा गया था. जिसमे बताते हैं कि रेलवे बोर्ड के एक डिप्टी डायरेक्टर और गृह मंत्रालय के एक डिप्टी सेक्रेटरी के साथ रंगेहाथ पकड़ी गई महिलाकर्मी रेलवे बोर्ड की ही थी, मगर इस पूरे मामले को गृह मंत्रालय के डिप्टी सेक्रेटरी ने अपनी पहुँच के बल पर तत्काल रफादफा करा लिया था. विश्वसनीय सूत्रों का कहना है कि रेलवे बोर्ड के उक्त रिंग लीडर और उसके साथी कुछ डिप्टी डायरेक्टरों के इस व्यभिचारी गुट में महिला टेलीफोन आपरेटर, लायब्रेरियन, रिसेप्शनिष्ठ, सेक्शन आफिसर और उनके नीचे स्तर की भी कुछ महिलाकर्मी शामिल बताई गई हैं. उनका कहना है कि अब इस गुट में रिंग लीडर का ख़ास दोस्त एक अधिकारी संगठन का पदाधिकारी भी शामिल हो गया है. जिसने इस व्यभिचारी गुट की गतिविधियों को अपनी खास काबिलियत से अब और ज्यादा बढ़ा दिया है, क्योंकि अब इसने अपने साथ मुफ्त की मौज-मस्ती करने वाली डायरेक्टर एवं ज्वाइंट डायरेक्टर स्तर की अपनी नजदीकी कुछ महिला अधिकारियों को भी इस गुट में शामिल कर लिया है. हालाँकि, रेल भवन के गलियारों में अब यह चर्चा लगभग आम हो गई है, तथापि कोई भी अधिकारी इस सम्बन्ध में खुलकर कुछ भी कहने या बताने से बच रहा है. फिर भी कुछ साहसी अधिकारियों ने, दबी जबान में और उनका नाम अथवा उनकी पहचान उजागर न करने की शर्त पर ही सही, मगर रेल भवन में इस प्रकार का व्यभिचार काफी लम्बे अरसे से चल रहे होने की बात की पुष्टि की है. इन साहसी अधिकारियों ने इस व्यभिचार गुट में शामिल सभी संभावित और असंभावित महिला कर्मियों एवं अधिकारियों के नामों तक की भी पुष्टि कर दी है. 'रेलवे समाचार' द्वारा इस अत्यंत शर्मनाक खबर को उजागर करने का उद्देश्य किसी नौकरीपेशा महिला रेलकर्मी की मानहानि करना अथवा उसकी भावनाओं को ठेस पहुँचाना नहीं, बल्कि सिर्फ यह है कि उनकी किन्हीं मजबूरियों का फायदा उठाकर और उन्हें इस व्यभिचार में घसीटकर उनका शारीरिक शोषण करने वालों पर लगाम लगाई जा सके और इसे पूरी तरह ख़त्म करके इससे प्रदूषित हो रहे रेल भवन के संपूर्ण कार्यालयीन वातावरण को स्वच्छ किया जा सके.

 

 

 

 

 


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