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Headlines :
 

अपने ही चक्रव्यूह में फंसा पू. रे. प्रशासन

कोलकाता : पहले डिप्टी सीओएम/प्लानिंग/कंस्ट्रक्शन की वर्कचार्ज पोस्ट का एलिमेंट उठाकर फिर उस पर सीनियर डीसीएम/समन्वय की पोस्ट क्रियेट करके, फिर उसे स्क्रेप किए जाने के कैट के निर्णय के खिलाफ हाई कोर्ट से स्टे आर्डर लेकर, फिर उसे भी स्क्रेप करके तथा उसके बाद उसका इस्तेमाल सीओएम के चापलूस सेक्रेटरी को जेएजी में प्रमोशन देने के लिए करके और रेलवे बोर्ड के आदेश के खिलाफ डिप्टी सीओएम/फ्वोईस-2 की एक एक्स्ट्रा पोस्ट क्रियेट करके पू. रे. प्रशासन अब बुरी तरह फंस गया है. खबर यह भी मिली है कि अब सीपीओ भी इस सारे गड़बड़ घोटाले को लेकर चिंतित दिखाई दे रहें हैं. पता चला है कि 19 अक्तूबर को सीओएम द्वारा सीनियर डीसीएम श्री अनिल कुमार को डिप्टी सीओएम/फ्वोईस की पोस्ट पर ज्वाइन न करने और बिना छुट्टी के ड्यूटी से गायब रहने की चिट्ठी उनके घर पर भेजवाने के बाद सीपीओ को इस बात का अहसास हुआ कि जब श्री अनिल कुमार ने अपना सीनियर डीसीएम का चार्ज अब तक छोड़ा ही नहीं है, तो उन्हें डिप्टी सीओएम/फ्वोईस की पोस्ट पर ज्वाइन करने के लिए कैसे कहा जा सकता है और यह चिट्ठी कैसे भेजी गई? बताते हैं कि इस बात को लेकर सीपीओ और सीओएम के बीच काफी गहन विचार-विमर्श हुआ है और अब यह निर्णय लिया गया है कि अब चुपचाप बैठा जाए और कोर्ट का निर्णय आने का इंतजार किया जाए.

परन्तु बताते हैं कि सीपीओ को अब इस बात की भी चिंता सता रही है कि जब हाई कोर्ट से सीनियर डीसीएम/समन्वय की पोस्ट स्क्रेप किए जाने के कैट के निर्णय के खिलाफ स्टे लिया गया था, तो उसे बिना हाई कोर्ट को बताए अथवा विश्वास में लिए बिना उक्त पोस्ट को स्क्रेप क्यों कर दिया गया, इससे तो अदालत की मानहानि का मामला बन जाएगा. सूत्रों का कहना है कि श्री अनिल कुमार ने इसके खिलाफ पहले ही कोर्ट में एक याचिका दायर कर दी है. इससे रेल प्रशासन अब और परेशान हो गया है. बताते हैं कि सीनियर डीसीएम/समन्वय की पोस्ट को बिना हाई कोर्ट को विश्वास में लिए उसे मुख्यालय में लाकर उसका इस्तेमाल सीओएम के चापलूस और हर फन में माहिर सेक्रेटरी विश्वजीत चक्रवर्ती को जेएजी में प्रमोशन देने के लिए किया गया है, जो कि न सिर्फ गलत हुआ है, बल्कि श्री चक्रवर्ती को जूनियर स्केल से जेएजी तक के सारे प्रमोशन उसी जगह दिए गए हैं और उन्हें पिछले करीब 10-12 वर्षों से सीओएम के सेक्रेटरी की ही पोस्ट पर बैठाए रखा गया है, जो कि पू. रे. में तमाम ट्रैफिक अफसरों की ट्रान्सफर/पोस्टिंग में हेराफेरी करके और माहवार 'चंदा' देने वाले ट्रैफिक अधिकारियों को 'कमाऊ' पोस्टों पर पोस्टिंग दिलवाकर मजबूत कमाई कर रहें हैं?

राप्त जानकारी के अनुसार डिप्टी सीओएम/प्लानिंग/कंस्ट्रक्शन की वर्कचार्ज पोस्ट 30 सितम्बर 2010 को श्री एम. एम. चौधरी के सेवानिवृत्त होने पर खाली हुई थी. इस पोस्ट को पहले मुख्यालय में फिर वहां से डिवीजन में ले जाकर श्री अनिल कुमार को परेशान और अधिकारविहीन करने के लिए सीनियर डीसीएम/समन्वय की पोस्ट क्रिएट की गई थी. अब इसी एलिमेंट का इस्तेमाल श्री चक्रवर्ती को प्रमोशन देने के लिए किया गया है, जबकि श्री चौधरी के सेवानिवृत्त होने पर इस पोस्ट पर एक अन्य ग्रुप 'बी' अधिकारी को प्रमोट किया जाना था. परन्तु श्री अनिल कुमार को परेशान करने के लिए रेल प्रशासन ने यह एलिमेंट वहां से उठा लिया, जिससे उक्त ग्रुप 'बी' अधिकारी को जेएजी प्रमोशन मिलने में करीब दो साल की देरी हुई थी. अब प्रशासन ने जहाँ इस एलिमेंट पर श्री चक्रवर्ती को प्रमोशन देकर चौथी-पांचवीं बार गलती की है, वहीँ डिप्टी सीओएम/फ्वोईस-2 की एक और पोस्ट क्रिएट करके अपनी गलतियों को बार-बार दोहराया है. जबकि रेलवे बोर्ड के पत्र संख्या 2006/C&IS/Project/FOIS/3rd Revised Estimate/1PP, Dated 25.06.2010 के अनुसार रेलवे बोर्ड ने 16 जोनल रेलों में से प्रत्येक को सिर्फ एक ही डिप्टी सीओएम/फ्वोईस की पोस्ट एलाट की है. तब सवाल यह उठता है कि डिप्टी सीओएम/फ्वोईस-2 की एक एक्स्ट्रा पोस्ट पू. रे. के पास आई कहाँ से..? यानि श्री अनिल कुमार को परेशान करने के लिए ही यह सारा तिकड़म किया गया था.

बताते हैं कि पू. रे. प्रशासन ने अदालत की मानहानि से बचने के लिए डिप्टी सीओएम/फ्वोईस-2 की पोस्ट क्रिएट की थी, जो कि अब उसके गले की फांस बन गई है. सूत्रों का कहना है कि यह सारा तिकड़म श्री अनिल कुमार को परेशान करने के लिए पूर्व अय्याश डीआरएम के साथ अय्याशी में लिप्त रहे जे. के. साहा जैसे पूर्व रेलमंत्री के कुछ सहायकों की मिलीभगत से किया गया था. बताते हैं कि अब पूर्व अय्याश डीआरएम के चले जाने और उनके साथ अय्याशी में लिप्त रहे पूर्व रेलमंत्री के सहायकों का दबाव कम हो जाने के बाद पू. रे. प्रशासन को इस बात का अहसास हो रहा है कि यदि अदालत की मानहानि से बचना है तो सीनियर डीसीएम/समन्वय की पोस्ट को फिर से डिवीजन में ले जाना पड़ेगा. सूत्रों का कहना है कि जब यह बात तय हो गई तो इसके साथ ही महाचापलूस विश्वजीत चक्रवर्ती का रिवर्सन होना भी तय हो गया. सूत्रों का कहना है कि श्री चक्रवर्ती को जब इस बात का पता चला तो वह अपना रिवर्सन टालने के लिए एक अधिकारी को एक महीने की छुट्टी पर जाने के लिए कहने चले गए. बताते हैं कि उनकी तारीफ यह है कि यह काम उन्होंने सीओएम के नाम पर किया.

जबकि सूत्रों का कहना है कि सीओएम ने श्री चक्रवर्ती से ऐसा कुछ भी करने के लिए नहीं कहा था. सूत्रों का यह भी कहना है कि इस महाचापलूस चक्रवर्ती ने ऐसा इसलिए किया, क्योंकि अगर उसके तीन महीने बीत जाते हैं, तो नियमानुसार उसे रिवर्ट नहीं किया जा सकेगा. इसीलिए उसने सीओएम के नाम पर यह चाल चली थी, जबकि सीओएम ने उक्त सम्बंधित अधिकारी से अब तक ऐसा कुछ भी न तो कहा है और न ही ऐसा कोई संकेत उसे दिया है. इससे इस महाचापलूस और काईयाँ अधिकारी की पोल खुल जाती है. अब देखना यह है कि पू. रे. प्रशासन अदालत में अपनी इन बार-बार दोहराई गई गलतियों से बचने के लिए क्या रास्ता अख्तियार करता है..?

 


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