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‘रेलवे समाचार’ की शुरुआत वर्ष 1997 में हुई थी. ‘रेलवे समाचार’ का पहला अंक 3 मई 1997 को ‘साप्ताहिक’ के रूप में कल्याण (मुंबई), महाराष्ट्र से प्रकाशित हुआ था. तमाम उतार-चढ़ाओं के बाद भी यदि ‘रेलवे समाचार’ तब से लेकर अब तक लगातार प्रकाशित हो रहा है, तो यह ईश्वर-कृपा के अलावा और कुछ नहीं हो सकता है. शुरू से ही इसके संपूर्ण कर्ताधर्ता और सर्वेसर्वा सुरेश त्रिपाठी ही रहे हैं. वर्ष 1991 में भारतीय रेल पर एक स्वतंत्र साप्ताहिक अखबार के प्रकाशन का विचार श्री त्रिपाठी के दिमाग में तब आया था, जब वह मुंबई से प्रकाशित अन्य प्रकाशनों के लिए ‘रेलवे बीट’ की रिपोर्टिंग कर रहे थे. भारतीय रेल पर वैसे तो तमाम विभागीय प्रकाशन हैं. हिंदी में ‘भारतीय रेल’ और अंग्रेजी में ‘इंडियन रेलवे’ नाम से इसकी मासिक पत्रिकाएं भी रेलवे बोर्ड स्तर पर प्रकाशित की जाती हैं. इसी तरह विभिन्न जोनल रेलों के भी ऐसे ही अपने-अपने प्रकाशन हैं. परंतु ‘रेलवे समाचार’ के अतिरिक्त संपूर्ण भारतीय रेल पर ऐसा कोई स्वतंत्र प्रकाशन आज भी नहीं है. जबकि 7 बड़ी उत्पादन इकाईयों सहित 16 जोनों, 68 मंडलों और सैकड़ों मरम्मत कारखानों एवं लोको शेडों में कार्यरत इसके 17.50 लाख कर्मचारियों एवं अधिकारियों का एक बहुत बड़ा पाठक वर्ग अकेले इस एक उद्योग समूह में एक छत के नीचे मौजूद रहा है. यह आज भी है, भले ही सरकारी नीतियों के चलते इसकी वर्क-फोर्स में करीब चार लाख की कमी आ गई है. तथापि एकमात्र ‘रेलवे समाचार’ के अलावा स्वतंत्र रूप से ऐसा कोई प्रकाशन नहीं है, जो कि इतने बड़े पाठक वर्ग को उसके ही कार्य-क्षेत्र की निष्पक्ष और गंभीर खबरों से अवगत करा सके.

यदि मालिक, मुद्रक, प्रकाशक और संपादक में परिस्थितियों से समझौता करने की प्रवृत्ति न हो, और विज्ञापनों के रूप में सरकारी कृपा प्राप्त न हो रही हो, तो किसी के लिए भी अखबार का प्रकाशन लगभग असंभव है. यह एक अत्यंत महंगा सौदा एवं शौक भी है. परिस्थितियों के सामने झुककर अथवा अपनी गरिमा के विपरीत जाकर समझौता करने की प्रवृत्ति सुरेश त्रिपाठी में कभी नहीं रही. परिणामस्वरूप वर्ष 2002 तक लगातार 12 पेज ‘साप्ताहिक’ निकालने के बाद ‘रेलवे समाचार’ का प्रकाशन प्रत्येक पंद्रह दिनों में ‘पाक्षिक’ के रूप में होने लगा, जो कि आज तक अनवरत जारी है. ‘रेलवे समाचार’ की छपी हुई प्रतियों की पहुंच की अपनी सीमा थी, जबकि भारतीय रेल का विस्तार असीमित (पूरे देश में) है. अतः इंटरनेट के विस्तार के साथ गूगल पर पहले इसका ब्लॉग शुरू हुआ और कुछ समय बाद वर्ष 2007 में www.railsamachar.com के नाम से इसकी वेबसाइट शुरू हुई. इससे ‘रेलवे समाचार’ की पहुंच भारतीय रेल के सभी जोनों और मंडलों सहित दूर-दराज कार्यरत ऊपर से नीचे तक के अधिकारियों एवं रेलकर्मियों तक होने के साथ ही इसकी पाठक संख्या में भारी वृद्धि हुई. समय के साथ ही ‘रेलवे समाचार’ की विश्वसनीयता में भी पर्याप्त इजाफा हुआ. आज इसमें प्रकाशित खबरों पर सरकार और रेल प्रशासन द्वारा पर्याप्त संज्ञान लिया जाता है. इससे रेल प्रशासन को भी भारतीय रेल के अंतर्गत चलने वाली विभिन्न प्रकार की गतिविधियों को देखने की एक अलग दृष्टि मिली. समस्याओं की पहचान और उनका निराकरण भी आसान हुआ. इसके चलते ‘रेलवे समाचार’ की वेबसाइट पर पाठक संख्या बहुत अधिक हो गई है. अतः अब न सिर्फ विषयों और खबरों के चयन, बल्कि वेबसाइट के दैनंदिन अपडेट की जिम्मेदारी भी बढ़ गई है.

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